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भारत से कैसे ज्यादा हुआ ताइवान का मार्केट कैप: आबादी, क्षेत्रफल से GDP तक में पीछे, फिर शेयर बाजार क्यों आगे?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 26 May 2026 03:12 PM IST
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सार
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भारत क्षेत्रफल में ताइवान से लगभग 91 गुना बड़ा है और आबादी के मामले में करीब 60 गुना बड़ा है। इसके अलावा भारत जीडीपी के मामले में भी ताइवान से चार गुना से ज्यादा बड़ा है। हालांकि, इन अंतर के बावजूद ताइवान के एआई और चिप निर्माण के क्षेत्र की वजह से उसका मार्केट कैप भारत से आगे निकल गया है। 

Taiwan surpasses Market Value of India Share Market on high AI investments FII Exit downgrades Indian Cap expl
भारत-ताइवान का मार्केट कैप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ताइवान के शेयर बाजार ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इस छोटे से द्वीप के शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त उछाल देखा गया। यह उछाल इतना ज्यादा रहा कि एक ही बार में ताइवान के स्टॉक मार्केट की कीमत भारत के शेयर बाजार से ज्यादा हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दिन ताइवान का शेयर बाजार करीब 4.95 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू का हो गया, जबकि भारत का शेयर बाजार लगातार गिरावटों के कुछ सिलसिलों की वजह से 4.92 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। वह भी तब जब सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही तेज बढ़त देखी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि ताइवान के शेयर बाजार का मार्केट कैप इस वैल्यू तक तब पहुंच गया है, जबकि उसकी अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले चार गुना से ज्यादा छोटी है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और ताइवान में आबादी, क्षेत्रफल और आर्थिक मानकों में कितना अंतर है? ताइवान का शेयर बाजार इन अंतरों के बावजूद भारत के शेयर बाजार से आगे कैसे निकल गया है? मौजूदा समय में दुनिया के शेयर बाजारों की मार्केट वैल्यू क्या है? भारत के शेयर बाजारों को हालिया दिनों में झटका क्यों लगा है? आइये जानते हैं...
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भारत और ताइवान में आबादी, क्षेत्रफल और आर्थिक मानकों में कितना अंतर है?


*आंकड़े WorldData.info से

आकार और आबादी: भारत क्षेत्रफल में ताइवान से लगभग 91 गुना बड़ा है और आबादी के मामले में करीब 60 गुना बड़ा है।

जनसंख्या घनत्व: भले ही भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, लेकिन ताइवान का आकार छोटा होने के कारण वहां का जनसंख्या घनत्व भारत से काफी अधिक है। वहां प्रति वर्ग किलोमीटर में भारत के मुकाबले लगभग 222 लोग ज्यादा रहते हैं।

अर्थव्यवस्था: कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) के मामले में भारत ताइवान से काफी आगे है। भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा समय में ताइवान से 425 फीसदी बड़ी है। हालांकि, अगर दोनों देशों की आबादी के अनुपात को देखें, तो ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से काफी अधिक बैठती है। इसकी वजह ताइवान की कम आबादी और बेहतर आर्थिक प्रगति है। 

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ताइवान का शेयर बाजार भारत के शेयर बाजार से आगे कैसे निकला?

यूं तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार ताइवान की तुलना में बहुत बड़ा है, फिर भी ताइवान का शेयर बाजार 4.95 ट्रिलियन डॉलर के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के मामले में भारत (4.92 ट्रिलियन डॉलर) को पीछे छोड़कर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। इस बड़े उलटफेर की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और चिप्स निर्माण के क्षेत्र में ताइवान का अग्रणी शक्ति के तौर पर आगे निकलना है। इसके अलावा ताइवानी टेक कंपनियों का दबदबा और बीते कुछ समय में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। 

1. एआई और चिप निर्माण में बेहतरीन प्रदर्शन

ताइवान के शेयर बाजार की इस तेजी का सबसे बड़ा कारण दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी- ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) है। एआई को लेकर दुनिया भर में बढ़ती मांग के बीच इस साल टीएसएमसी के शेयरों में 49% का उछाल आया है। ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स में अकेले टीएसएमसी की हिस्सेदारी लगभग 42% है, जो ताइवान के बाजार को एआई क्रांति का सीधा फायदा पहुंचाता है।

2. टेक हार्डवेयर कंपनियों का दबदबा

ताइवान का बाजार मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी (टेक) हार्डवेयर कंपनियों पर केंद्रित है, जो वर्तमान में वैश्विक एआई निवेश चक्र के बिल्कुल केंद्र में हैं। जिन देशों के शेयर बाजारों में टेक हार्डवेयर कंपनियों की कमी है, वे अब ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से पिछड़ रहे हैं।

3. ताइवान के नए अनुकूल नियम

ताइवान के वित्तीय नियामक ने हाल ही में घरेलू निवेश फंडों के नियमों में ढील दी है। नए नियमों के अनुसार, अब घरेलू फंड किसी एक सूचीबद्ध कंपनी में अपनी शुद्ध संपत्ति का 25% तक निवेश कर सकते हैं (पहले यह सीमा 10% थी), बशर्ते उस कंपनी का इंडेक्स में वेटेज 10% से अधिक हो। वर्तमान में केवल टीएसएमसी इस मानक को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन चेस के मुताबिक, इस कदम से ताइवान के बाजार में छह अरब डॉलर से ज्यादा का नया फंड आ सकता है।

भारत के शेयर बाजार में गिरावट कैसे बनी ताइवान के आगे निकलने की वजह?


विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की भारी निकासी: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक निवेशकों ने इस साल भारतीय इक्विटी से लगभग 24 अरब डॉलर निकाल लिए हैं और उस पूंजी को ताइवान और दक्षिण कोरिया में एआई-कंपनियों से लाभ के लिए स्थानांतरित कर दिया है।

एआई से जुड़ी कंपनियों की कमी: भारत में ऐसी कंपनियों की मौजूदगी सीमित है, जो सीधे तौर पर एआई इकोसिस्टम के विस्तार से जुड़ी हों। इसके उलट इस बात का डर सता रहा है कि एआई बूम भारतीय आईटी सेक्टर के मौजूदा बिजनेस मॉडल को नुकसान पहुंचा सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव: मार्च की शुरुआत से ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष और अनिश्चितता का निवेशकों की धारणा पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा अमेरिका की तरफ से लगातार रूस और ईरान से व्यापार को लेकर टैरिफ की धमकियों से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण भी बाजार में बिकवाली देखी गई है।

आर्थिक दबाव: भारतीय बाजार ऊंचे वैल्यूएशन, कमजोर होते रुपये, ऊर्जा की बढ़ती लागत (ईंधन के दाम) और कॉरपोरेट आय बढ़ोतरी के धीमे होने जैसी चिंताओं से जूझ रहा है। इसके चलते एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज भी 19% से गिरकर 12% के आसपास आ गया है।

यानी संक्षेप में कहें तो ताइवान ने एआई और हार्डवेयर निर्माण में अपनी तकनीकी एकाधिकार का फायदा उठाया है, जबकि भारत महंगे वैल्यूएशन और विदेशी फंड्स के बाहर जाने के कारण इस दौड़ में थोड़ा पिछड़ा है।

मौजूदा समय में दुनिया के शेयर बाजारों की मार्केट वैल्यू क्या है? 

ताइवान की यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है, क्योंकि वैल्यू बढ़ने के साथ ही उसका शेयर बाजार अब दुनिया में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उसके आगे सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार ही हैं। पहले यह स्थान भारत के पास था, जो कि अब शेयर मार्केट वैल्यू में छठे स्थान पर आ गया है।


 
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