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एक वोट से हार के बाद DMK पहुंची हाईकोर्ट: तिरुपत्तूर चुनाव में बड़ा मोड़, क्या विजय की शपथ से पहले होगा खेला?
आईएएनएस, चेन्नई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 10 May 2026 03:08 AM IST
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मात्र एक वोट से मिली हार के बाद डीएमके नेता पेरियाकरुप्पन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी के दावों के बीच अब 10 मई की सुनवाई तय करेगी कि टीवीके उम्मीदवार विधायक की शपथ लेंगे या तिरुपत्तूर में फिर से वोटों की गिनती होगी। क्या है पूरा मामला? खबर में जानिए...
मद्रास हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। मद्रास उच्च न्यायालय रविवार को एक बेहद अहम याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। यह याचिका पूर्व मंत्री और डीएमके के वरिष्ठ नेता केआर पेरियाकरुप्पन ने दायर की है। उन्होंने तिरुपत्तूर सीट से टीवीके उम्मीदवार श्रीनिवास सेतुपति की जीत को चुनौती दी है। पेरियाकरुप्पन ने मांग की है कि सेतुपति को विधायक के रूप में शपथ लेने से रोका जाए।
इतिहास की सबसे करीबी टक्कर
शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर इस बार कांटे की टक्कर देखी गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, टीवीके के श्रीनिवास सेतुपति को 83,365 वोट मिले। वहीं, डीएमके के पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर मात्र एक वोट रहा। यह तमिलनाडु के चुनावी इतिहास की सबसे रोमांचक जीत में से एक है। पेरियाकरुप्पन ने इस परिणाम को धांधली बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी का आरोप
पूर्व मंत्री ने अपनी याचिका में मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर सीट के पोस्टल बैलेट गलती से तिरुपत्तूर जिले की दूसरी सीट पर भेज दिए गए थे। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि इन गुमशुदा मतपत्रों को बरामद किया जाए। पेरियाकरुप्पन चाहते हैं कि उन वोटों को वापस लाकर फिर से गिनती की जाए। उन्होंने मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग पेश करने के निर्देश देने की भी अपील की है।
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यह भी पढ़ें: सिर्फ एक वोट से जीता चुनाव: कौन हैं विजय की पार्टी के एस. सेतुपति? जिन्होंने मंत्री पेरियाकरुप्पन को हराया
कोर्ट का रुख
यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो चुका है। तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। ऐसे में एक-एक सीट का महत्व बढ़ गया है। जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की वेकेशन बेंच 10 मई को सुबह 10.30 बजे इस पर सुनवाई करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एक वोट का अंतर होने के कारण कोर्ट का फैसला सरकार के गठन पर भी असर डाल सकता है।
अन्य वीडियो-
इतिहास की सबसे करीबी टक्कर
शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर इस बार कांटे की टक्कर देखी गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, टीवीके के श्रीनिवास सेतुपति को 83,365 वोट मिले। वहीं, डीएमके के पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर मात्र एक वोट रहा। यह तमिलनाडु के चुनावी इतिहास की सबसे रोमांचक जीत में से एक है। पेरियाकरुप्पन ने इस परिणाम को धांधली बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
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पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी का आरोप
पूर्व मंत्री ने अपनी याचिका में मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर सीट के पोस्टल बैलेट गलती से तिरुपत्तूर जिले की दूसरी सीट पर भेज दिए गए थे। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि इन गुमशुदा मतपत्रों को बरामद किया जाए। पेरियाकरुप्पन चाहते हैं कि उन वोटों को वापस लाकर फिर से गिनती की जाए। उन्होंने मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग पेश करने के निर्देश देने की भी अपील की है।
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कोर्ट का रुख
यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो चुका है। तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। ऐसे में एक-एक सीट का महत्व बढ़ गया है। जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की वेकेशन बेंच 10 मई को सुबह 10.30 बजे इस पर सुनवाई करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एक वोट का अंतर होने के कारण कोर्ट का फैसला सरकार के गठन पर भी असर डाल सकता है।
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