UP: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अखिलेश यादव को दी खुली चुनौती, बोले- जिस मुद्दे पर बहस करना चाहें, कर लें
ऊर्जा मंत्री ने कहा, सपा सरकार के समय ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय गांवों में हफ्ते में एक बार ही बिजली आती थी, लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे और बच्चे झूला झूलते थे।
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प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आजकल प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की चिंता जता रहे हैं, लेकिन अगर उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में इसका 25वां हिस्सा भी ध्यान दिया होता, तो प्रदेश की बिजली व्यवस्था इतनी जर्जर और खस्ताहाल नहीं होती। ऊर्जा मंत्री ने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि 'सूप तो सूप, चलनी भी बोले जिसमें 72 छेद।' उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि जिनके शासनकाल में बिजली व्यवस्था बदहाल थी, वह आज सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अखिलेश यादव जिस भी मुद्दे पर बहस करना चाहते हैं, वह उस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
विद्युतीकरण और उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि
ऊर्जा मंत्री ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 1947 से लेकर 2017 तक करीब 70 वर्षों में उत्तर प्रदेश के केवल 1.28 लाख मजरों का ही विद्युतीकरण हो पाया था। जबकि वर्ष 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में और नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से यह संख्या बढ़कर लगभग 3 लाख मजरों तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक प्रदेश में केवल 1 करोड़ 80 लाख बिजली उपभोक्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 72 लाख हो गई है। पिछले चार वर्षों में ही लगभग 40 से 45 लाख नए बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। इसके विपरीत, सपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में केवल साढ़े आठ लाख कनेक्शन ही दिए गए थे।
पीक डिमांड में दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी
अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सपा सरकार के समय प्रदेश में बिजली की औसत पीक डिमांड लगभग 13 हजार मेगावाट थी। उन्होंने वर्षवार आंकड़े देते हुए बताया कि 2012 में करीब 12 हजार मेगावाट, 2013 में 13 हजार मेगावाट, 2014 में 14 हजार मेगावाट और 2016-17 तक यह बढ़कर 15 हजार मेगावाट पहुंची थी। इस तरह पांच वर्षों का औसत करीब 13 हजार मेगावाट रहा। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश की पीक डिमांड 27 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जो सपा सरकार के समय की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह बढ़कर 31 हजार मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे देश में सबसे अधिक पीक डिमांड आपूर्ति करने वाला राज्य बनने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
शहरों को 24 घंटे बिजली दी जा रही, जबकि गांवों में 18 से 22 घंटे तक
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सपा सरकार के समय ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय गांवों में हफ्ते में एक बार ही बिजली आती थी, लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे और बच्चे झूला झूलते थे। कहा कि अखिलेश यादव के समय में जब हम गांव आया करते थे तो लोग बताया करते थे की इस सोमवार को बिजली आ गई है तो अब अगले सोमवार को ही आएगी।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में शहरों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है, जबकि गांवों में 18 से 22 घंटे तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब बिजली केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों, फैक्ट्रियों और कृषि क्षेत्र को भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
'स्मार्टफोन गलत जानकारी नहीं देता, उसी तरह स्मार्ट मीटर भी गलत बिल नहीं देता'
स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच ऊर्जा मंत्री ने इसे पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रणाली बताया। उन्होंने कहा कि जैसे स्मार्टफोन गलत जानकारी नहीं देता, उसी तरह स्मार्ट मीटर भी गलत बिल नहीं देता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लागू करने के शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं हैं। सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और जब तक व्यवस्था पूरी तरह सरल और उपभोक्ता अनुकूल नहीं हो जाती, तब तक इसे व्यापक स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
सपा सरकार के भ्रष्टाचार पर भी साधा निशाना
ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि जिन उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, उनका कनेक्शन काटने से पहले पांच बार मैसेज भेजकर सूचित किया जाएगा, ताकि उन्हें पर्याप्त समय मिल सके। एके शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान बिजली विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था। उन्होंने कहा कि उस समय मीटर रीडर और अधिकारी मनमाने तरीके से बिल बनाते थे, कभी बहुत अधिक, तो कभी बहुत कम और इस प्रक्रिया में आम उपभोक्ताओं का शोषण होता था।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर इस तरह के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाती है और मानवीय हस्तक्षेप कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगर बिजली व्यवस्था गड़बड़ थी तो उसकी जिम्मेदार समाजवादी पार्टी का शासनकाल था। इन्होंने बिजली विभाग में योग्य कर्मचारियों की भर्ती न करके अपने-अपने लोगों की भर्ती की थी। अखिलेश यादव ने ऐसा करके बिजली तंत्र में बबूल बोने का काम किया था, जिन्हें हम उखाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। तकनीक पर आधारित स्मार्ट मीटर की व्यवस्था उसी प्रयास का एक भाग है।
चार वर्षों में प्रदेश में 30 लाख से अधिक खंभे बदले गए
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में 30 लाख से अधिक बिजली के खंभे बदले गए हैं और लाखों ट्रांसफॉर्मरों का उच्चीकरण किया गया है। इसके अलावा, ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। उन्होंने यह भी कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है और उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हो रही है। ऊर्जा मंत्री ने जनता से अपील की कि सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
