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Panipat News: शिकायत के बाद भी नहीं मिली इंटरनेट की स्पीड, कंपनी पर पांच हजार का जुर्माना
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पानीपत। बार-बार शिकायत करने पर भी ब्राडबैंड इंटरनेट की स्पीड मुहैय्या न कराने पर उपभोक्ता आयोग ने एक्साइटेल ब्रॉड बैंड कंपनी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता द्वारा जमा किए गए पांच हजार रुपये और मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए पांच हजार रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं।
कंपनी ने 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया तो नौ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। बराना गांव के बलबीर सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उन्होंने मार्च 2024 में एक्साइटेल ब्रॉडबैंड कंपनी से इंटरनेट कनेक्शन लिया था। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन कंपनी के खाते में पांच हजार रुपये का भुगतान किया था।
कंपनी के कर्मचारी ने उन्हें 3,538 की रसीद दी थी। कनेक्शन लगने के बाद भी उनकी इंटरनेट सेवा बाधित रही। कभी स्पीड कम रही तो कभी दो-तीन दिन तक नेटवर्क पूरी तरह से बंद होता रहा, जिस कारण उन्होंने कंपनी को इसकी शिकायत दी, लेकिन कंपनी ने कोई समाधान नहीं किया। बार-बार शिकायत और मेल करने के बावजूद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत देकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा ने की।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कनेक्टिविटी की जिम्मेदारी उनके क्षेत्रीय भागीदार की थी और शिकायतकर्ता ने उसे पक्षकार नहीं बनाया। कंपनी ने सेवा में कमी से इन्कार करते हुए शिकायत खारिज करने की मांग की। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
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कंपनी ने 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया तो नौ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। बराना गांव के बलबीर सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उन्होंने मार्च 2024 में एक्साइटेल ब्रॉडबैंड कंपनी से इंटरनेट कनेक्शन लिया था। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन कंपनी के खाते में पांच हजार रुपये का भुगतान किया था।
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कंपनी के कर्मचारी ने उन्हें 3,538 की रसीद दी थी। कनेक्शन लगने के बाद भी उनकी इंटरनेट सेवा बाधित रही। कभी स्पीड कम रही तो कभी दो-तीन दिन तक नेटवर्क पूरी तरह से बंद होता रहा, जिस कारण उन्होंने कंपनी को इसकी शिकायत दी, लेकिन कंपनी ने कोई समाधान नहीं किया। बार-बार शिकायत और मेल करने के बावजूद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत देकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा ने की।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कनेक्टिविटी की जिम्मेदारी उनके क्षेत्रीय भागीदार की थी और शिकायतकर्ता ने उसे पक्षकार नहीं बनाया। कंपनी ने सेवा में कमी से इन्कार करते हुए शिकायत खारिज करने की मांग की। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।